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Tinka Tinka Madhya Pradesh

पुस्तक समीक्षा: तिनका तिनका मध्य प्रदेश

·      लेखक: डॉ. वर्तिका नन्दा

·      प्रकाशक का नाम: तिनका तिनका फाउंडेशन

·      प्रकाशन वर्ष: 2018

·      पृष्ठों की संख्या: 160

·     आईएसबीएन: 9789353210151

·      पुस्तक का मूल्य: 995

 

पुस्तक का सारांश:

तिनका तिनका मध्य प्रदेश डॉ. वर्तिका नन्दा के जेल आंदोलन का एक नया अध्याय है। तिनका तिनका तिहार और तिनका तिनका डासना के बाद अब उनकी नई पुस्तक तिनका तिनका मध्य प्रदेश बाजार में उपलब्ध है। यह पुस्तक डॉ. नन्दा की मध्य प्रदेश की विभिन्न जेल यात्राओं पर आधारित है। यह एक मिनी कॉफ़ी टेबल बुक है। इस पुस्तक को 12 पुरूष बंदियों, 2 महिला बंदियों, 4 बच्चों(अपनी मां के साथ जेल में बंद) और एक प्रहरी ने रचा है।

जेलों में कला, रचनात्मकता और परिवर्तन का संगम है तिनका तिनका मध्य प्रदेश। यह जेलों के सबसे सकारात्मक और रचनात्मक पक्ष को लाने का असाधारण और दुनिया में अपनी तरह का पहला प्रयास है। इस पुस्तक को 9 हिस्सों बांटा गया है: रंगों का बाइस्कोप, कारागार में कारीगरी, बच्चे, जिनका पता है जेल, लिखती हैं जेलें, अतीत सोखती सलाखें, मुट्ठी में काश, सामने बड़ा आकाश, कैद में कलम, कूची, कलाकार, ऐसे जुड़े तिनके और तिहाड़ से भोपाल तक की जेल-यात्रा।

दिलचस्प बात यह भी है कि यह किताब जेल के हर कोने को बंदियों की ही बनाई तस्वीरों से दिखाती है। इसका एक अध्याय- बच्चे, जिनका पता है जेल- जेलों में अपना मां या पिता के साथ आए बच्चों को गाथा है( बच्चों की उम्र छह साल से कम हैं और उनमें से तीन का जन्म जेल में ही हुआ है)। मुट्ठी में काश, सामने बड़ा आकाश- उन बंदियों पर है जिन्हें अपने अपराध पर पश्चाताप है और वे अपनी जिंदगी नए सिरे से शुरू करना चाहते हैं।

किताब की शुरुआत में एक पन्ने पर एक पेड़ दिखाई देता है। यह पेड़ उज्जैन में तूफ़ान आने के दौरान गिर गया था और बंदियों ने उसे एक कलात्मक रूप दे दिया। इस पेड़ की पृष्ठभूमि में लेखिका ने लिखा है-

“जेल में बाहर से न कोई रसोइया आता है, न हज्‍जाम। न माली, न मोची। जेलें सब कुछ नए सिरे से शुरू करने और जिदंगी के अस्थायी होने के भाव को समझने में माहिर होती हैं। जो आया है, वो लौटेगा। जेलें किसी का इंतजार नहीं करतीं। किसी को आमंत्रण नहीं देतीं। किसी को जाने से नहीं रोकतीं। किसी के जाने से यहाँ कुछ खाली नहीं होता। किसी कड़ी के टूटते ही एक दूसरी कड़ी से उस खाली हुए हिस्‍से को तुरंत भर देने में जेलों को महारत होती है। इसी समझ और आधार पर जेलें चलती हैं।”

यह किताब जेल सुधार और मानवाधिकार की नजर से एक ऐसा अनूठा प्रयोग है जिसकी पहले किसी ने कल्पना नहीं की। लेखिका के अनुसार इस पुस्तक को लगभग 2 वर्ष की अवधि में रचा गया है। इस किताब का विमोचन गृह राज्य मंत्री श्री किरेन रिजीजू ने किया था।

पुस्तक की भाषा:

डॉ. नन्दा ने इस पुस्तक को बेहद सरल भाषा में लिखा है, जो एक आम मानस के लिए अहम है। किताब में जेल की जरुरी शब्दावलि को भी संजो कर रखा गया है।

निष्कर्ष:

मेरे लिए इस पुस्तक को पढ़ना बेहद सार्थक रहा। इस पुस्तक में मध्य प्रदेश की जेलों के जरिए देश भर की जेलों का आकलन और उनकी झाकियां शामिल हैं। इसमें जो चित्रों के जरिये जेल की कहानी बयां की है वो अपने आप में एक नया प्रयोग है।

सुझाव:

जेलों पर शोध करने वाले लोगों के लिए यह पुस्तक काफी मददगार रहेगी। इस पुस्तक में गहन शोध किया है और जेलों की अनसुनी कहानियां और सच्चाई सामने लाने की कोशिश की गई है। इस पुस्तक को जरूर पढ़ा जाना चाहिए। इस किताब के जरिये तिनका तिनका यह भी आग्रह किया है कि, आप इस पुस्तक को खरीद के देश की विभिन जेलों में भिजवा सकते हैं। ऐसा कर आप जेलों के सुधार में अपना योगदान दे सकेंगे।

 

समीक्षक का परिचय:

हर्ष वर्धन

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