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Category: Columns on Prisons

दो आंखें बारह हाथ और देश की खुली जेल…

जेलें एक आम रास्‍ता नहीं है. यही वजह है कि जेलों के बारे में जानने के लिए साहित्‍य और फिल्‍में सबसे आसान साधन बनती हैं. यह माध्यम कभी कोरी कल्पना और कभी [ … ]

तिनका तिनका : जेलों में बेकाबू ‘भीड़’ और सुप्रीम कोर्ट की जायज चिंताएं

तिनका तिनका : वर्तिका नंदा अप्रैल 9, 2018 मार्च के आखिरी हफ्ते में सुप्रीम कोर्ट में मौजूद रहकर भारत की 1382 जेलों की अमानवीय स्थिति पर हो रही सुनवाई का हिस्सा बनना [ … ]

खुली जेलों पर सुप्रीम कोर्ट, मीडिया और मानवाधिकार

तिनका तिनका : वर्तिका नंदा मार्च 19, 2018 देश की 1382 जेलों की बदहालत ने अब सुप्रीम कोर्ट को सामने आने पर मजबूर कर दिया है. राजस्‍थान लीगल सर्विस अथॉरिटी [ … ]

जब जेलों में लिखी गई देश की तकदीर

तिनका तिनका : वर्तिका नंदा मार्च 2, 2018 जेलों ने आजादी के संघर्ष के उतार-चढ़ाव बखूबी देखे. आज बात कुछ उन नामों की जिनके लेखन का बड़ा हिस्सा जेल में [ … ]

आंखों में सपने संजोए बंदी: 14 पेट्रोल पंप, हजारों उम्मीदें…

तिनका तिनका : वर्तिका नंदा फरवरी 3, 2018 मैं जब हैदराबाद पहुंची, तब रात हो चुकी थी. बीच रास्ते गाड़ी चलाते ड्राइवर ने अचानक एक जगह गाड़ी रोकी और बोला- [ … ]

जेलों पर लिखने वाले ऐसे तीन किरदार, जिनकी कहीं बात नहीं हुई

तिनका तिनका : वर्तिका नंदा फरवरी 3, 2018 इस बार का कॉलम जेलों में रहकर या जेल को महसूस कर लिखने वाले तीन ऐसे किरदारों पर है, जिनकी कहीं बहुत [ … ]

जेलों को जन और तंत्र से जोड़ दिया जाए तो बन सकती हैं राष्ट्र निर्माण का ‘गीत’

तिनका तिनका : वर्तिका नंदा जनवरी 26, 2018 राजपथ भी सजा. गणतंत्र की बातें भी हुईं. एक दिन की सरकारी छुट्टी और राष्ट्रभक्ति के गीत. यह 26 जनवरी की वह [ … ]

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