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Jail Reporters

जब जेल के बच्चों ने दुनिया देखी

आज जेल एक सुधारगृह के रूप में सामने आ रही है विगत दिनों में जेल में बंदियों द्वारा कई एसे काम किये जा रहे जिससे ये लगता है कि बंदी वास्तव में सुधार की ओर अग्रसर है | उनके इस काम में जेल कर्मचारी तथा अधिकारीगण पूर्ण रूप से उनके अच्छे कार्यो में सहयोग करते है एवं प्रोत्साहित भी करते है | जैसे प्रात;काल के समय बंदीगण पाठशाला कक्ष में योग करते है तथा प्रशिक्षित बंदियों से अन्य बंदियों को योग सिखाया जाता है वर्तमान में जगदीश  पुत्र गोविन्द जोकि ३०२ भादवि में आजीवन की सजा भुगत रहा है | वो अपना समय चित्रकारी में बिताता है तथा उसके कई चित्र बाहर लोगो द्वारा सराहे गये है एवं तिनका-तिनका म०प्र० में पेंटिंग्स भेजे गये है |

सुधार की अनूठी पहल के रूप में दिनांक १७-१२-२०१७ को जेल उपअधीक्षक श्री प्रभात कुमारएवं श्रीमती वन्दना दीक्षित (शिक्षिका)के द्वारा जेल में परिरूद्धमहिलाओं के साथ रह रहे बच्चे वैष्णवी पुत्री मालती, कृष्णा पुत्र सुमन एवं सिद्धि पुत्री काजल एवम शांति निकेतन में रह रही ०६ वर्ष से अधिक की दो बच्च्चियों सोनम पुत्री उमा एवं पूनम पुत्री उमा को समाज से जोड़ने के लिए बाहर घुमाने ले गये| उन्होंने बच्चो को चिड़ियाघर, सूर्य मन्दिर अवं अन्य स्थानों की सैर करवाई|

चिड़ियाघर को देखकर बच्चे बड़े आनन्दित हुए वे केवल चूहे, तोता, बिल्ली को ही पहचान पाएबाकी जानवरों के बारे में उनको बताया गया वे यह देखकर बहुत ही खुश हुए इसके साथ-साथ झूले सी-सौ (see-saw), आदि का आनंद लिया | उनको देख कर लगता ही नहीं था कि उन्होंने आज से पहले इन सब चीजो का आनंद लिया होगा| सूर्य मंदिर को भी देखकर आनन्दित हुए उन्हें सूर्य मन्दिर के बारे में आसमान में तपते सूरज को उक्त मंदिर में होना समझाया जो उन्होंने बहुत ही ध्यान से सुना | हम शासन से तथा विभाग से यह आशा करते है कि समय समय पर बच्चो तथा जो बंदी की जिस भी चीज में रूचि हो उसे करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए जिससे वो बाहर समाज में जाकर आसानी से जुड़ सके तथा उसे किसी चीज के लिए भटकना नहीं पड़े

आशा करता हूँ कि समय-समय पर ऐसे कार्य होते रहेंगे जिससे जेल सुधार का अंतिम सपना “अच्छानागरिक” समाज को वापस मिल सके|

दुर्गेश पुत्र राजकुमार भदौरिया

धारा-३०२ भादवि, आजीवन

 केन्द्रीय जेल ग्वालियर (म०प्र०)

Image Courtesy – CNN

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