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कसाब और याकूब मेमन की फांसी कराने वाली पुलिस अधिकारी ने बताया, कैसे गुजरे दोनों आतंकियों के आखिरी पल

बोर्वान्कर ने कहा कि कसाब मुंबई स्थित आर्थर रोड जेल में आईटीबीपी की कस्टडी में था और हमें उसे वहां से पुणे यरवदा जेल लेकर जाना था।

शनिवार को बोर्वान्कर ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डिवेलेपमेंट के डाटरेक्टर जनरल पद से रिटायर हुई हैं। (Photo Source: Facebook)

(सुनंदा मेहता)

मुंबई 26/11 के दोषी अजमल केस में गुपनीयता बनाए रखना सरकार के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती थी। गोपनीयता बनाए रखने को लेकर पूर्व उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री आर.आर. पाटिल बहुत दृढ़ थे। कोर्ट मिले ऑर्डर के बाद कसाब को आर्थर रोड़ जेल से यरवदा जेल (जहां कसाब को फांसी होनी थी) में शिफ्ट करना एक बहुत बड़ा टास्क था, जिसमें कई एजंसियां शामिल थीं और इस कार्य को अच्छे से करना एक चुनौती थी। महाराष्ट्र की पूर्व इंस्पेक्टर जनरल मीरन चड्ढा बोर्वान्कर ने बताया कि कसाब को फांसी देने के ढाई साल बाद याकूब मेनन को फांसी दी जानी थी इसलिए हमें बहुत ही सहजता के साथ काम करना था।

शनिवार को बोर्वान्कर ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डिवेलेपमेंट के डाटरेक्टर जनरल पद से रिटायर हुई हैं। बार्वान्कर देश की एकलौती महिला आईपीएस हैं जो कि फांसियों की गवाह हैं। द संडे एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में अपने 36 वर्षीय के कैरियर में बोर्वान्कर ने 2012 में कसाब और 2015 में मेनन की विवादित और चुनौतीपूर्ण की फांसी पर बात की। बोर्वान्कर ने कहा कि कसाब मुंबई स्थित आर्थर रोड जेल में आईटीबीपी की कस्टडी में था और हमें उसे वहां से पुणे यरवदा जेल लेकर जाना था। कसाब को बेहोश करके क्राइम ब्रांच टीम को सौंपा गया था। जेल विभाग से हमने आईजी रैंक के अधिकारी को भेजा था जो कि कसाब को पुणे लानी वाली टीम का नेतृत्व करते।

Courtesy: Jansatta
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